October 23, 2017

सुप्रीम कोर्ट में AIMPLB का स्टैंड मज़बूत

शम्स तबरीज़ कासमी

सुप्रीम कोर्ट में  ट्रिपल तलाक  पर पिछले पांच दिनों से सुनवाई जारी है आज छठा और अंतिम दिन है , पूरी मिल्लते इस्लामिया की नज़र इस मुद्दे पर है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला किया  आता है, इस मामले में किसकी जीत होती है और किसकी हार तलाक के संबंध में सरकार का स्पष्ट रुख है कि यह महिलाओं के साथ अवांछनीय और भेदभाव है, तलाक के सभी इस्लामी तरीके महिलाओं के साथ ज़ुल्म व ज़्यादती पर आधारित हैं, भाजपा सरकार तलाक के बारे में नया संविधान लाना चाहती है, सरकारी वकील अटार्नी जनरल ने  तीसरे दिन इस स्टैंड  को साफ शब्दों में दोहराया भी दिया है कि सरकार फिर से तलाक के सभी इस्लामी तरीका के खिलाफ है ख है,एक मजलिस के तीन तलाक हो, तीन मजलिस  की तीन तलाक हो, तलाके अहसन हो,  बिदअत  हो या कुछ और  हो। यहीं से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि भाजपा सरकार मुस्लिम महिलाओं को अधिकार दिलाना नहीं बल्कि इस्लामी शरीयत में हस्तक्षेप करना चाहती है,यकसां सिविल कोड  के बजाय विभिन्न मुद्दों में हस्तक्षेप का यह नया तरीका अपनाया है, दूसरी ओर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बहुत मजबूती के साथ तलाक का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही है और तर्क और क़राइन से लग रहा है कि बोर्ड का रुख बहुत मजबूत है, विशेष रूप से सुनवाई के चौथे दिन  कांग्रेस  नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत का  मोड़ बिल्कुल बदल दिया, पिछले तीन दिनों की चर्चा से  मुसलमानों में जो निराशा पैदा हुई थी और ऐसा लग रहा था कि बोर्ड को केस  में झटका लगेगा वह आशंका समाप्त होगी, कपिल सिब्बल ने अदालत में साफ शब्दों में कहा कि शरीयत  की आधारित केवल कुरान नहीं बल्कि हदीस भी है, इस्लामी शरीयत कुरान और हदीस के संयोजन का नाम है, कुरान में कहा गया है कि अल्लाह की भी बात मानो और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की भी बात मानो, इसलिए तलाक और अन्य समस्याओं के बारे में कुरान के साथ हदीस भी शरीअत  में शामिल होगा, उन्होंने कहा कि तीन तलाक का जिक्र कुरान में स्पष्ट रूप से मौजूद है, जहां तक रही बात एक मजलिस  में तीन तलाक तो कुरान इस संबंध में चुप है और हदीस पाक में एक मजलिस की  तीन तलाक का  ज़िक्र है , नबी करीम  सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबा के युग में ऐसा होता रहा है और आज तक उसी का पालन जारी है, 1400 वर्षों से तलाक की यह प्रथा चली आ रही है इसलिए अदालत को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है, यह शुद्ध धार्मिक मामला है, उन्होंने तीन तलाक को विश्वास से जोड़ा और धार्मिक मामला भी साबित करने की पूरी कोशिश करते हुए कहा कि जिस तरह हिंदुओं का विश्वास है कि राम अयोध्या में पैदा हुए इसी तरह मुसलमानों के तीन तलाक के बारे में विश्वास है, यहाँ समझाने चाहिए कि कपिल सिब्बल ने तलाक को धर्म और आस्था से जोड़ने के लिए यह उदाहरण दिया है, उन्होंने यह नहीं कहा कि बाबरी मस्जिद को हम राम जन्मभूमि मानते हैं बल्कि उन्होंने कहा कि राम जन्म भूमि अयोध्या के बारे में जिस तरह हिन्दुओं का विश्वास है इसी तरह तीन तलाक के बारे में मुसलमानों का विश्वास है और यह सिलसिला चौदह सौ साल से चला आ रहा है, यह बात भी स्पष्ट है कि तलाक का फैसला धार्मिक दृष्टि से होगा जबकि बाबरी मस्जिद का मुकदमा भूमि के स्वामित्व का है और इसी आधार पर अदालत को फैसला करना है, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के पहले दिन ही कहा था कि अगर यह साबित हो गया कि तीन तलाक धार्मिक मामला है तो अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी इसलिए रक्षा वकीलों के लिए तलाक को पूरी धार्मिक मामला साबित करना सबसे महत्वपूर्ण है ,और  इसीलिए उन्होंने यह मिसाल पेश की है।

कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि पुरुषों के वर्चस्व वाला हर समाज पक्षपाती है, हिंदू धर्म में पिता अपनी संपत्ति की वसीयत किसी को भी कर सकता है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में ऐसा नहीं है, हिंदू समाज में ऐसी कई परंपराओं की ओर इशारा कर सकता हूँ, क्या यह सही है कि कोई महिला तलाक के लिए आवेदन दे और 16 साल तक संघर्ष करे  और उसे कुछ हासिल न हो, उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में आवृत्ति वैवाहिक परंपरा है, लेकिन उसे संरक्षण प्राप्त है क्योंकि यह परंपरा है और केवल समाज तय करेगा कि उसे कब बदला जाएगा। कपिल सिब्बल के मजबूत पक्ष ने अदालत का रुख बदला है और ऐसा लग रहा है अदालत में बोर्ड का रुख मजबूत हो रहा है, पांचवें दिन भी बोर्ड अभियोजन पक्ष ने बहुत मजबूती के साथ अपना पक्ष पेश किया है, मक़बूल एजाज बट ने चर्चा के दौरान कहा इस्लाम में निकाह पक्षों के बीच एक अनुबंध है और महिला को अधिकार है कि वह अपनी शर्तों के साथ यह समझौता करे , उन्होंने कहा कि महिलाओं के पास चार रास्ते हैं, वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत  विवाह कर सकती है, महिला निकाह में तीन तलाक न देने की शर्त लगा सकती है, महिला खुद भी तलाक देने का अधिकार प्राप्त कर सकती है और महिला इस शर्त को भी लगा सकती है कि ट्रिपल तलाक  दी महार  की राशि बतौर जुर्माना बढ़ जाएगी, बोर्ड के दूसरे वकील यूसुफ हाशिम मचखाला ने अदालत में बोर्ड संकल्प भी पढ़कर सुनाई, जमीअत के वकील ने भी मजबूत तरीके में बचाव किया, लेकिन जमीअत वकील वी गिरि ने एक बहुत बड़ी गलती भी की , उन्होंने जब यह कहा कि एक मजलिस के तीन तलाक कुरान से साबित होता है और इस संबंध में अधिक चर्चा की तो जज ने उन्हें बैठा दिया और कहा कि आप गलत तर्जमानी  कर रहे हैं।

 वकीलों की चर्चा से अनुमान लग रहा है कि अदालत में बोर्ड के  स्टैंड को मजबूती मिल रही है और निर्णय ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन में आएगा, बोर्ड पूरी टीम भी लगातार लगी हुई और वकीलों की लगातार रहनुमाई की जारही  है, बोर्ड के महा  सचिव मौलाना वली रहमानी, सचिव मौलाना खालिद सुरक्षित अल्लाह रहमानी सहित कई महत्वपूर्ण विद्वानों और ज़िम्मेदारों दिल्ली में है  और दिन और रात एक किए हुए हैं, आज मौलाना खालिद सुरक्षित अल्लाह रहमानी साहब से   मेरी मुलाक़ात भी हुई और उन्होंने बताया कि वकीलों को पूरा विवरण बताया जाता  है, उन्हें सभी उमूर  से परिचित कराया जाता है, किताब , उसका पेज  और सर्वक की फोटी कॉपी और फिर अंग्रेजी अनुवाद करके वकीलों को  दिया जा रहा है, घंटों उनके साथ बैठकर उन्हें समझाया जाता है, मौलाना खालिद सुरक्षित अल्लाह रहमानी साहब ने यह भी कहा सुप्रीम कोर्ट के  वकीलों का कहना  हैं कि बोर्ड के रुख को  अदालत में मजबूत मिल  रही है और पूरी उम्मीद है कि फैसला पक्ष में आएगा, सरकार अपने नापाक एजेंडे में सफल नहीं हो पाएगी, खासकर उन्होंने कपिल सिब्बल के वकालत पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि सभी वकीलों का मानना ​​है कि उन्होंने अभूतपूर्व वकालत की है और अदालत का रुख अब बदल गया है। यह बात भी उल्लेखनीय है कि सरकारी वकीलों अभी तक तलाक को गैर इस्लामी साबित करने में असफल हैं वह केवल महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और दुर्व्यवहार के नज़रिए से देख रहे हैं, जबकि बोर्ड ने महिलाओं को ज़ुल्म व ज़्यादती से सुरक्षित रखने के लिए सभी समाधान भी पेश कर दिया है, लगे हाथ  इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित होने वाली इस रिपोर्ट को भी देख लें जिसके अनुसार सीआर डीडी पि ने हाल ही में मुसलमानों के बीच तलाक पर एक व्यापक सर्वेक्षण किया है जिसमें एक मजलिस  में तीन तलाक की घटना केवल 0.33 प्रतिशत है, यानी आधा प्रतिशत से भी कम है, लेकिन फिर भी भारत का सबसे बड़ा मुद्दा यही तीन तलाक हैऔर सरकारी व्यवहार यह स्पष्ट होगया  है कि तीन तलाक बहाना है शरीयत  में हस्तक्षेप और मुस्लिम पर्सनल लॉ को  खत्म करना मूल गंतव्य है, उन लोगों को भी सरकार ने ठेंगा दिखा दिया है जो हाथ में कुरान लेकर कहा करते थे कि हमें कुरान कानून तलाक चाहिए कि मुल्लाओं का नहीं।

(लेखक  मिल्लत टाइम्स के संपादक हैं)

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