जानिये कौन है, झूठी खबर फैलाने वाली मधु किश्वर ?

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इस देश में ही नहीं पूरी दुनिया में अफवाह और झूठ से लबालब ख़बरें नफ़रत फैलाने और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए फैलाई जाती रही हैं. पर झूठ के इस घटिया कारोबार में पिछले कुछ साल से भारी बढ़ोतरी हुई है. दरअसल सोशलमीडिया की आने के बाद नफ़रतवादियों ने इसका जमकर उपयोग किया है.

भारत में पिछले कुछ समय से नफ़रत के इस कारोबार में न सिर्फ कम पढ़ा लिखा बल्कि हायर एजुकेटेड तबका भी शामिल हो गया है. इस तबके ने अपनी ओछी मानसिकता के कई नमूने पेश किये हैं. एक समुदाय विशेष से एक अजीब नफ़रत का नमूना कभी अपनी फेसबुक वाल पर तो कभी अपने ट्वीट में दर्शाया है.

बड़ी अजीब बात है, कि ये तबक़ा कभी खुद को आज़ाद ख्याल बताता है तो कभी उसी आज़ाद खयाली में एक समुदाय विशेष के विरुद्ध नफ़रत का उच्च स्तर का नमूना पेश करता है. इसमें जितना आगे संघ और भाजपा से जुड़े लोग रहे हैं, उतना ही आगे कम्युनिस्ट विचारधारा के लोग भी रहे हैं. जिसमे कई लोग तो हद से आगे बढ़कर बिलकुल वैसा ही व्यवहार करते नज़र आते हैं, जैसा कि संघ के लोग करते हैं.

ये बात जानकार भी आपको हैरानी होगी, कि संघ और भाजपा के लोग मुस्लिमों और इसाईयों के विरुद्ध जिस नफ़रत का संचार करते हैं. उस नफ़रत और झूठ के संचार के लिए वो जिस मटेरियल का उपयोग करते हैं, वो उस वामपंथी साहित्य का उपयोग करते नज़र आते हैं. जो मुस्लिम समुदाय को टार्गेट करके लिखा गया है. इस तरह वामपंथी विचारधारा का एक धड़ा वही कार्य करता नज़र आता है, जो कार्य संघ और भाजपा के लोग करते आये हैं.

मधु किश्वर

दरअसल वामपंथी भी दो तरह के हैं, एक वोह जो जो धर्म और मज़हब के नाम पर होने वाले अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करते हैं, गरीबों , मज़दूरों और किसानो के हक की लड़ाई लड़ते नज़र आते हैं. पर एक दूसरा टाईप वो भी है, जो वामपंथ के चाईनीज़ और फ्रांसीसी वर्ज़न को फ़ॉलो करते हुए उदारवाद का नकली चोला ओढ़कर समुदाय विशेष के विरुद्ध ज़हर उगलने से भी परहेज़ नहीं करते. उनका ये ज़हर सभी धर्म, मज़हब और समुदायों के विरुद्ध होता है.

नफ़रत तो नफ़रत है, चाहे हिन्दू के खिलाफ़ फैलाई जाए या मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़, या अन्य किसी समुदाय के खिलाफ़. पर सोशलमीडिया में सक्रीय ये तबक़ा झूठ फैलाने में हिन्दुओं को मुस्लिमों के  खिलाफ़ और मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ़ भड़काने में अहम भूमिका निभाता है. वो सारा मटेरियल जो संघ से जुड़े लोग मुस्लिमों और ईसाईयों के विरुद्ध उपयोग करते हैं. बनता तो इसी वामपंथ या फ़र्ज़ी उदारवाद की फैक्ट्री में है.

ताज़ा मामला मधु किश्वर का है, हाँ वही मधु किश्वर जो किसी समय वामपथी संगठन SFI से जुड़ी रही हैं. फ़िलहाल भाजपा और संघ की आडियोलोजी का कभी खुलकर तो कभी छुपा हुआ समर्थन करती नज़र आती हैं. अक्सर सोशलमीडिया में संघ और भाजपा  व मधु किश्वर का स्टैंड एक ही नज़र आता है. वो खुलकर नरेंद्र मोदी का समर्थन करती भी नज़र आई हैं. इन्हें अक्सर पाकिस्तानी विवादित लेखक तारेक फ़तेह और मुस्लिम विरोध करने वाले अन्य लेखकों का समर्थन करते पाया गया है.

मामला कुछ यूं है, कि मधु किश्वर ने एक ट्वीट करके हरियाणा में करणी सेना के प्रदर्शन के बाद स्कूल बस पर किये गए हमले पर ट्वीट किया. जिसमे उन्होंने सिर्फ अपने मुस्लिम विरोधी मानसिकता के कारण झूठी खबर फैलाते हुए उस हमले के लिए 5 मुस्लिम लड़कों की गिरफ्तारी की बात कही. उनका यह झूठी खबर वाला ट्वीट बहुत वायरल हो रहा था. नफ़रत फैलाने वाले संगठन और दलों के लोग अपनी अपनी वाल और पेजेज़ से वो झूठ फैला रहे थे. कि हरियाणा पुलिस ने एक ट्वीट करके मधु किश्वर द्वारा फैलाए इस झूठ पर पानी फेर दिया. जब बवाल मचा और मधु किश्वर के झूठ के कारण उनकी किरकिरी होने लगी. तो उन्होंने अपने झूठ पर सफ़ाई देते हुए माफ़ी भी मांगी.

देखें मधु किश्वर का वो ट्वीट –

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देखें हरियाणा पुलिस का ट्वीट –

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मधु किश्वर की माफ़ी वाला ट्वीट –

सवाल ये उठता है, कि इतना गैर ज़िम्मेदाराना ट्वीट क्यों किया गया. एक समुदाय विशेष के खिलाफ़ इस तरह की नफ़रत फ़ैलाने से क्या राष्ट्र की एकता को नुकसान नहीं पहुंचाया गया ? क्या इस तरह के गैर ज़िम्मेदाराना ट्वीट एक शिक्षित व्यक्ति को शोभा देते हैं ?

इसका जवाब ये है, कि मधु किश्वर एक समुदाय विशेष के विरुद्ध कई ट्वीट लिखती आई हैं. उनकी मानसिक स्थिति को समझना है, तो जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय की शोध छात्रा शहला राशिद के एक ट्वीट के जवाब में दिया गया उनका ट्वीट देखिये. उस वक़्त आपको बिलकुल उसी तरह की अनुभूति होगी, जिस तरह की अनुभूति कुछ नफ़रतवादियों के ट्वीट और बोलियों से होती है.

वो उस ट्वीट में शहला राशिद को वही बात बोल रही हैं, जो इस देश के मुस्लिम समुदाय से हर नफ़रत वादी व्यक्ति करता है. उन्होंने शहला को पाकी एजेंट की तरह व्यवहार न करने की सलाह दी. जोकि मुस्लिम समुदाय के प्रति उनकी विषैली सोच को प्रदर्शित करता है. सवाल ये उठता है, कि मानव अधिकार जैसे अहम क्षेत्र में काम करते हुए उस क्षेत्र में संस्था का संचालन करने वालाकोई व्यक्ति कैसे इस तरह की सोच को प्रदर्शित कर सकता है.

दरअसल शेहला राशिद ने  अक्षय कुमार की फिल्म पैडमेन के प्रचार के दौरान ABVP के झंडे  को लहराने और उसके प्रचार करने के कारण ट्वीट करके आलोचना की थी. जिसके बाद मधु किश्वर भड़क गयीं थीं. और उन्होंने संघ और भाजपा के विरोध करने पर शेहला के व्यवहार को पाकी एजेंट  की तरह का व्यवहार साबित करने की कोशिश की.

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ऐसे कई सवाल उठते हैं, क्योंकि वर्तमान भारत उस दौर से गुज़र रहा है, जिस दौर में नफ़रत भरे मैसेजेज़ और फ़ेक न्यूज़ पर आधारित ट्वीटस व सोशलमीडिया पोस्ट, फोटोशॉप की गई इमेजेज़ देश की एकता को तोड़ने के लिए उपयोग किये जा रहे हैं. जिनके ज़रिये समुदाय विशेष के विरुद्ध इतनी नफ़रत भर दी जाती है, कि शम्भू जैसे कई हत्यारे समाज में पैदा हो जाते हैं.

देश की एकता और अखंडता के लिए आवश्यक है कि झूठ और नफ़रत फैलाने वाले लोगों से देश को बचाया जाए. ताकि देश के अन्दर आपसी भाईचारे और प्रेम का संचार हो.

Courtesy: Tribunehindi.com

Written by: Md Zakariya khan