द वायर(The Wire) का पढ़े लिखे मुसलमानो को Self Haters बनाने का मिशन

यह एक कटु सत्य है कि संघियों से ज़्यादा मुसलमानों का  नुकसान सिकुलर/लिबरल(Secular, liberal and Communist) तबक़े करते हैं।

~The Wire आज कल संघ /भाजपा से लड़ने में सबसे बड़ा वाला क्रांतिकारी अखबार कहला रहे हैं।

अब इस स्क्रीन शॉट को ही देख लीजिए इस स्टोरी में इस्लाम को ही कटघरे में खड़ा करके मुसलमानों को सेल्फ हेटर बनाने की एक कामयाब कोशिश की गयी है जो सरासर निराधार बातो के इर्द गिर्द घूम रहा है||

इस स्टोरी में सुदर्शन न्यूज़, ज़ी न्यूज़, और लल्लनटॉप जैसे इस्लामोफिबिक प्रोपगेंडा हाउस से मिलती जुलती हेडिंग और रिपोर्टिंग द वायर ने कर रखी है ||

द वायर के अंग्रेज़ी, हिंदी और उर्दु तीनो ही संस्करण में आपको एक से बढ़ कर एक इस्लामोफोबिया क्रिएट करने वाला मटेरियल मिल जायेगा।

जो लोग जानकार है और चीजों को देखने का क्रिटिकल नजरिया रखते है वो इनकी बदमाशी और धूर्तता को आसानी से पकड़ लेंगे।
लेकिन अवाम इनकी धूर्तता और बदमाशी के झांसे में आसानी से आ जाती है।

द वायर को एक्सपोज़ करने के लिए मैंने दो तीन पोस्ट लिखा था लेकिन जब किसी सेक्युलर कहलाने वाले गुट की आलोचना कीजियेगा तो आम लोग खासकर मुसलमान जल्दी सच मानते नहीं है और उलटा आपको ही कटघरे में खड़ा कर देते है। लोगो का सेकुलरो पर भरोसा होता है जिसे अंध भक्ति भी कह सकते है वो जल्दी टूटता नहीं है नतीजे में लोग गिलाज़त को भी हज़म करते रहते है और अवाम की अंध भक्ति की वजह से सच बताना ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

भारतीय माहौल में देखने में आता है के आमतौर से सेक्युलर लोगों का साम्प्रदायिकता के खिलाफ बोलना एक ट्रैप होता है ताकि सेकुलरो के विरोध के नाम पर मुसलमानों की एक खास तादाद को पहले अपना ऑडिएंस बनाया जाए और फिर उनके ज़हनो को अपना एजेंडा पिलाया जाए, जिस तरह शेर का शिकार करने के लिए बकरी बाँधी जाती है और मचान पर बैठ कर शेर का इंतजार किया जाता है उसी तरह मुसलमानों के शिकार के लिए सेकुलर और वामपंथी लोग सांप्रदायिकता को कोसने का चारा डालते हैं जिसको देख कर मुसलमान इनके झांसे में आता है और फिर ये अपनी आइडियोलोजी को आम मुसलमानों में इंजेक्ट करके मुसलमानों के दीन और इमान का शिकार करते रहते है।|

ये लोग अच्छे खासे मुसलमानों को सेल्फ हेटर और अपोलोजेटिक बना चुके है और बना रहे हैं क्योंकि मुसलमानों ने ही इनका सबसे ज्यादा प्रचार प्रसार किया होता है तो ज़्यादातर मुस्लमान ही इनके चारो तरफ मंडराते रहते हैं।|

अगर कोई दुसरे धर्म का आदमी ऐसी बात लिखेगा तो मुसलमान उस लेखक को साम्प्रदायिक समझेगा और संघी समझेगा इसलिए उस एंगल से भी सेफ साइड लेने के लिए इनके लेखक सूची में सेल्फ हेटर मुसलमानों की एक अच्छी खासी तादाद भी मौजूद है|
ये सेकुलरो की मेहनत से तय्यार लोग है, जिन्हें मुस्लमान संघी भी नहीं कह सकेगा और अगर इनका विरोध करेगा तो आपसी सर फुटव्वल भी होगा |

जब द वायर जैसे सेकुलरो और वामपंथी प्लेटफोर्म इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ मोर्चा खोलते है और उसके जवाब में मुसलमानों में से कुछ लोग सेकुलरो और वामपंथियों का विरोध करते आलोचना करते है, तब कुछ लोग सेकुलरो और वामपंथियों के वकील बनकर सामने आते है और कहते है के अगर सेकुलरो और वामपंथियों का विरोध करोगे तो साम्प्रदायिकता के विरुद्ध लड़ाई कमज़ोर हो जाएगी लेकिन जब सेकुलर और वामपंथी लोग इस्लाम और मुसलमानों को निशाना बनाते है तब वो लोग वामपंथियों और सेकुलरो से ये नहीं कहते के आप इस्लाम और मुसलमानों को टारगेट मत करो इससे साम्प्रदायिकता के विरुद्ध लड़ाई कमज़ोर होगी ||
वामपंथियों और सेकुलरो ने ऐसे मानसिक गुलाम भी ठीक ठाक मात्रा में तय्यार कर रखे है जो वामपंथियों और सेकुलरो के इस्लामोफिबिक प्रोपगेंडा के खिलाफ बोलने वाले मुसलमानों को ही चुप रहने की नसीहत करते रहते है ||’

  1. Courtesy : Md Iqbal के फेसबुक वाल से