इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी आलम ए अरब, दक्षिण एशिया और मुस्लिम अल्पसंख्यक देशों का सबसे विश्वसनीय फ़िक़्ही संस्था

इस्लामिक फ़िक़्ह  अकादमी  भारत के 26वीं फ़िक़्ही सेमिनार शुरू

उज्जैन से शम्स तबरेज़ क़ासमी की रिपोर्ट
मिल्लत टाइम्स

शहर उज्जैन में आयोजित होने वाले इस्लामी प्रसिद्ध फ़िक़्ही और अनुसंधान संगठन इस्लामिक फ़िक़्ह अकादमी भारत के 26 वें तीन दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अकादमी के महासचिव मौलाना खालदसीफ अल्लाह रहमानी ने कहा कि इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी की स्थापना 1989 में हुई थी जिसे आज 28 साल का समय बीत गया है और शहर उज्जैन में 26 वां सेमिनार आयोजित हो रहा, इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी (इस्लामिक फ़िक़्ह अकैडमी) आधुनिक फ़िक़्ही समस्याओं के व्युत्पन्न और कुरान व हदीस की रोशनी में समस्याओं के अनुमान की एक ऐसी कोशिश है जिसे दुनिया भर में सराहा जारहा है , आलिम अरब, दक्षिण एशिया और मुस्लिम अल्पसंख्यक देशों में यह सबसे विश्वसनीय फ़िक़्ही संस्था का दर्जा प्राप्त हो गई है, कई अरब फुज़ला (विद्धमान) ने अकादमी की सेवाओं पर पीएचडी भी की है, अकादमी ने छोटे अंतराल में कई समस्याओं के बारे में जो फैसले किए हैं बड़े विद्वानों ने उसे समकालीन आवश्यकताओं से संगत करारदीया है। मोलाना ने मज़ीद कहा कि अकादमी के अब तक 25 सेमिनार में 155 से अधिक विषयों चिन्ता की बुनियाद और केंद्र बनाया गया और कुल मिलाकर दो सौ संकल्प पास हुई हैं, फ़िक़्ही समस्याओं को हल करने के अलावा इस दौर में उत्पन्न विचारधारा पर इस्लामी दृष्टिकोण से विचार का 37 मजलिस मज़ाकर का आयोजन किया गया है।
इससे पहले मजलिस गठबंधन मिल्लत के ज़िम्मेदारों और सेमिनारों की स्वागत समिति के प्रमुखों मौलाना अशफ़ाक़ुर रहमान और मौलाना तैयब नदवी ने अलग अलग धर्मोपदेश स्वागत पेश करके यहां आने लाने वाले सभी मेहमानान किराम फ़ुक़्हा और विद्वानों का तह दिल से स्वागत किया और उज्जैन शहर के इतिहास बताते हुए कहा कि यह शहर देशवासियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है, यहां के पानी से स्नान करने को पापों से मुक्ति का साधन समझा जाता है। उन्होंने कहा कि हम तह दिल आभारी हैं इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी का कि उन्होंने शहर उज्जैन की जनता और यहां अग्रणी संगठन मजलिस गठबंधन इत्तेहाद उम्मत को 26 वीं संगोष्ठी की मेजबानी का शरफ दी।
इसके अलावा उद्घाटन निशशत ईरान से आए मौलाना अब्दुल क़ादिर आरिफ, अकादमी के अध्यक्ष मौलाना नेमतुल्लाह आजमी शिक्षक हदीस दारुल उलूम देवबंद, मुफ्ती जुनैद अहमद साहब फलाही मौलाना डॉक्टर अब्दुल्लाह जूलम साहब हैदराबाद, मुफ्ती अब्दुल्लाह मारूफी साहब शिक्षक दारुलउलूम देवबंद, मुफ्ती सादिक़ मोहिउद्दीन फहीम ,मौलाना बुरहान संभली उपाध्यक्ष इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी संबोधित करेंगे, निज़ामत का कर्तव्य मुफ्ती उबैदुल्लाह असद साहब कर रहे हैं।

मौलाना राबि हसनी नदवी का संदेश

अकादमी के संरक्षक मौलाना राबि हसनी नदवी सद्र ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि पेश आमदा और आवश्यक मुद्दों के निर्वहन काम हर दौर में विद्वानों देते रहे हैं, साथ ही जरूरत के मद्देनजर इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी की स्थापना आया जो आधुनिक समस्याओं का हल कुरान व सुन्नत की रौशनी में पेश किया जाता है और इसके सचिव मौलाना खालिद सैफूल्लाह रहमानी अपनी बौद्धिक अंतर्दृष्टि और फ़िक़्ही क्षमता से काम लेते हुए इसे बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, 26 वां फ़िक़्ही संगोष्ठी शहर उज्जैन में आयोजित होरहा जिस के लिए शहर के सभी सज्जनों को बधाई है और उम्मीद करते हैं कि आगामी की तरह इस सेमीनार भी सफल होगा।

अरब जगत के प्रसिद्ध और विद्वान डॉ सलाहुद्दीन सुल्तान ने अकादमी के नाम अपने लिखे संदेश में अकादमी सेवाओं को बहुत अधिक सराहते हुए इस्लामी और फ़िक़्ही दुनिया के लिए महान कारनामा दिया है , वह अपने विस्तृत संदेश में उलेमा हिंद के बौद्धिक और फ़िक़्ही सेवाओं का विस्तृत उल्लेख किया और कहा कि भारत में दारुल उलूम देवबंद फ़िक़्ही अकादमी जैसे संस्थानों इस्लाम की खेती कर रहे हैं और मुसलमानों को शरीयत पर अमल पैरा होने के लिए रास्ता प्रदान कर रहे हैं।

मौला ना अरशद मदनी साहब का संदेश

जमीअत उलेमा हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी साहब ने अपने संदेश में कहा कि मेरी प्रबल इच्छा थी कि अकादमी के सेमिनार में आने की लेकिन कुछ महत्वपूर्ण व्यस्तता के कारण नहीं आ सका, वह इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी को समकालीन लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा इस तरह की संस्था बहुत महत्वपूर्ण हैं, उन्होंने इस अवसर पर मुसलमानों से एकता और सहमति कायम करने की अपील की।

तुर्की के प्रसिद्ध विद्वान डॉ अकरम कलश
 
तुर्की के प्रसिद्ध विद्वान डॉ अकरम कलश ने अकादमी के लिए लिखे गए अपने संदेश में कहा कि आधुनिक समस्याओं का समाधान करना और मुसलमानों को शरीयत की राहों से आगाह करना और दुनिया के सामने इस्लाम की सही तस्वीर पेश करना समकालीन सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और भारत ने हर दौर में इस्लाम की इस अहम् सेवा को अंजाम दिया है। मुझे बेहद खुशी है कि मौजूदा दौर में भी भारत में एक ऐसा ही संस्था इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी है जिसे प्रसिद्ध शास्त्री काजी मुजाहिद इस्लाम कासमी ने स्थापित किया था और दिन ब दिन वह विकास की ओर दौड़ती है और आधुनिक समस्याओं के निर्वहन में यह संस्था काफी अहम् कारनामा अंजाम दे रहा है।

मौलाना काजी अब्दुल जलील कासमी काजी इमारत ए शरिया पटना

तीन तलाक को महिलाओं पर अत्याचार करार देकर जो प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं दरअसल वह तलाक बाएंन और तलाक राज,ई के प्रभाव से नावाकिफ़ हैं। तलाक न होना प्रकृति के खिलाफ है। मुस्लिम युवा और उलेमा जनता को व्यवस्था की सहीह शिक्षा से परिचित कराएं।

मौलाना मुफ्ती सादिक मोहिउद्दीन फहीम पनिज़ामी (हैदराबाद)

नई समस्याओं के निर्वहन के लिए हर दौर में इज्तेहाद क्या गया है, वर्तमान युग में नए मसाएल की तख्रीज और इज्तेहाद का कर्तव्य इस्लामिक न्यायशास्त्र अकादमी द्वारा अंजाम दिया जा रहा है जो सक्षम बधाई के लायक़ हैं।

मौलाना अब्दुल्ला पमारूफ़ी

दारुल उलूम देवबंद में विभाग विशेषज्ञता प्रति हदीस के शिक्षक मौलाना अब्दुल्ला प्रमुख साहब ने अपने भाषण में कहा कि इस्लामिक न्यायशास्त्र ( फ़िक़्ह) अकादमी क़ुरआन की इस आयत के अनुसार जो विचार करने का आदेश दिया गया है, सामूहिक विचार विमर्श के लिए यह संस्था बहुत बड़ा वरदान है, मौलाना खालिद सैफूल्लाह रहमानी साहब बधाई के युग् जो काजीमौलाना मुजाहिदुलिस्लाम कासमी साहब के नक्शेकदम पर चलते हुए जयपुर में दुनिया भर से गियानी व विदद्वानी को इकट्ठा करके नित नई समस्याओं पर ग़ौर व फ़िक्र करके एक समाधान निकाल रहे हैं।

मौलाना नेमतुल्लाह आजमी शिक्षक हदीस दारुल उलूम देवबंद

अकादमी के अध्यक्ष मौलाना नेमतुल्लाह आजमी शिक्षक हदीस दारूल उलूम देवबंद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अकादमी ने व्यापार और खरीदने और बेचने सहित कई मुद्दों पर संतोषजनक शोध कार्य किया है और सभी सुझावों सामने आ गई हैं, अब जरूरत है कि अन्य दो फ़िक़्ही बहस को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इस्लामी कार्यकाल में इसी अंदाज़ से इज्तेहाद क्या जा था खरीद और बेचने सहित सभी समस्याओं इज्तेहाद के बाद जो सर्वसम्मति प्रस्ताव होती थी, हुकूमत इसे लागू करती थी, इस्लामिक( फ़िक़्ह) न्यायशास्त्र अकादमी भी इसी तरीके से अपना कर्तव्य अंजाम दे रही है।

मौलाना जुनैद अहमद ने धन्यवाद देते हुए कहा कि हम इस्लामिक ( फ़िक़्ह) न्यायशास्त्र अकादमी के ज़िम्मेदारों के तह दिल से आभारी हैं कि उन्होंने हमारे अनुरोध को स्वीकार करते हुए मेजबानी का शरफ़ बख़्शा । उन्होंने कहा कि अन्य सभी राज्यों में विद्वानों और फ़ुक़्हा का आगमन जारी था लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा था इसलिए यहां ( फ़िक़्ह ) न्यायशास्त्र अकादमी कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि शहर के मुसलमानों के अलावा हिंदू समाज के लोग भी अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं और आप सभी प्रतिभागियों का सेवा करना हम अपनी सआदत समझते हैं और मेहमान नवाज़ी में अगर कोताही हो रही है तो इसके लिए माफी माँगता हूँ।

इस्लामिक ( फ़िक़्ह अकादमी ) न्यायशास्त्र अकादमी इंडिया के उपाध्यक्ष हज़रत मौलाना बुरहान उद्दीन संभली साहब की दुआ पर पहली बैठक संपन्न हुई।