महात्मा गांधी ने तिरंगे को सलाम करने से इंकार कर दिया था

नई दिल्ली
मिल्लत टाइम्स/भोपाल समाचार
१४/०८/2016

जिस राष्ट्रध्वज को आज सारा देश शान से फहराता है, शुरूआत में उसी तिरंगे को महात्मा गांधी ने अस्वीकार कर दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक कह दिया था कि यदि इस तिरंगे को राष्ट्रध्वज घोषित किया गया तो मैं इसे सलाम नहीं करूंगा। गांधी तिरंगे के बीच में चरखा हटाकर ‘अशोकचक्र’ को शामिल करने से बेहद खफा थे।

सबसे पहले 2 रंग का था राष्ट्रध्वज
समय था 2 अप्रैल 1931 का, उस समय कांग्रेस ने एक कमेटी बनाई जिसमें 7 सदस्य थे, यह कमेटी उस समय राष्ट्रीय ध्वज को अंतिम रूप देने के लिए बनाई गई थी। 1931 को करांची में इस कमेटी के सदस्य “पट्टाभी सितारमैया” ने राष्ट्रीय झंडे को अंतिम रूप देने के बाद में पेश कर दिया। इस ध्वज में ऊपर केसरिया तथा नीचे सफ़ेद रंग की पट्टी थी और बीच में एक नीले रंग का चक्र था। इस ध्वज के नीचे ही आजादी की अंतिम लड़ाई लड़ी गई थी।

ब्रिटिश यूनियन जैक लगवाना चाहते थे अंग्रेज
जब अंग्रेजो ने भारत को छोड़ कर जाने का फैसला कर लिया, तब फिर से राष्ट्रीय ध्वज का सवाल खड़ा हुआ और उस समय संविधान सभा ने डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में एक नई कमेटी का गठन 23 जून 1947 को किया तथा अगले दिन यानि 24 जून को अंतिम वायसरॉय लार्ड माउंटबेटेन ने अपना प्रस्ताव दिया की भारत और ब्रिटेन के लंबे संबंध रहें हैं इसलिए भारत के झंडे के एक कोने में ब्रिटिश यूनियन जैक का निशान भी होना चाहिए पर अधिकतर लोग इस प्रस्ताव के खिलाफ थे।

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगे की संवैधानिक रूप से घोषणा कर दी। इसमें ऊपर केसरिया, नीचे हरा और बीच में सफेद रंग था। पहले इसमें सफेद रंग पर बीच में गांधीजी का चरखा लगाया गया था लेकिन बाद में इसे बदलकर अशोकचक्र शामिल किया गया।

महात्मा गांधी ने किया तीव्र विरोध
इस बदलाव के साथ में तिरंगा अब राष्ट्रीय ध्वज बन चुका था पर गांधी जी इस बदलाव के खिलाफ थे इसलिए 6 अगस्त 1947 को गांधी जी ने कहा कि “मेरा ये कहना है कि अगर भारतीय संघ के झंडे में चरखा नहीं हुआ तो मैं उसे सलाम करने से इंकार करता हूं।” असल में गांधी जी का मानना था कि यह चक्र “अशोक की लाट” से लिया गया है जो की हिंसा का प्रतीक है और भारत की आजादी की जंग अहिंसा के सिद्धांतो पर लड़ी गई है। इसलिए अशोक चक्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज पर नहीं होना चाहिए। पर पटेल जी और नेहरू जी ने गांधी जी को समझाया की तिरंगे के चक्र का मतलब विकास है और यह अहिंसा का ही प्रतीक है। बाद में काफी अनमने मन से गांधी जी ने इस झंडे को स्वीकृति दे दी और 15 अगस्त 1947 के दिन भारत में हमारा वर्तमान तिरंगा लहराया गया।

किसने बनाया तिरंगा
आइए आपको बताते हैं कि भारत का राष्ट्रध्वज किसने बनाया। इस महान व्यक्ति का ना है पिंगाली वैंकैया और यह 2 अगस्त को 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपत्‍तनम में पैदा हुए थे। पिंगाली वैंकैया ने लगभग 30 देशों के राष्‍ट्रध्‍वजों का निरीक्षण और अध्धयन किया और इसके बाद में अपने देश के राष्‍ट्रध्‍वज की रूप रेखा तैयार की। उन्होंने हिन्दुओं के प्रतीक रंग के रूप में लाल रंग का चयन किया था। बाद में इसे केसरिया किया गया।

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