तारिक अनवर के 19 साल बाद घर वापसी पर सियासी गलयारो में हलचल….!!

सबनवाज अहमद: राफेल मुद्दे पर वरिष्ठ नेता तारिक़ अनवर के द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सभी पदों से इस्तीफा देकर बतौर कांग्रेस में पुनर्वापसी के बाद सीमांचल बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। कटिहार समेत सीमांचल के कई दिग्गज कांग्रेसी नेताओं में भी एक गजब सी बेचैनी छा गई है। या यूं कहें कि कांग्रेस का सियासी पारा इस बदलते हुए मौसम में भी लगातार चरमसीमा की ओर बढ़ रहा है। खासकर कटिहार लोकसभा क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले तारिक अनवर अब 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी से लड़ना तय है…

वैसे तारिक़ अनवर के कांग्रेस में आने के बाद पार्टी में कई नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। कटिहार के कांग्रेसी नेतागन तो तारिक अनवर के विरोध में भी बोलते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के युवा नेता सह राष्ट्रीय सचिव तौकीर आलम ने तो 5-6 पन्ने का पत्र लिखकर पहले ही विरोध जता चुके हैं जिसमे तारिक़ अनवर पर नीतिगत और निजी हमले भी किये है, पत्र में तौकीर ने खुल कर लिखा है कि तारिक़ साहब ने कटिहार के आवाम के साथ काम के नाम पर धोखा किया है,

जबकि हाल के दिनों में पोस्टर बाज़ी भी कटिहार में देखने को मिला। तारिक़ के स्वागत में जितने भी पोस्टर बैनर शहर में लगाये गए थे स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के चित्र ही उसमे गायब थे। जिसका विरोध खुद पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रेम राय जता चुके है। ऐसा कहा जा रहा है कि तारिक़ अनवर का कांग्रेस में वापसी के बाद अब सीमांचल समेत बिहार कांग्रेस पर तारिक़ का जलवा फिर से बरकरार हो जाएगा जिसका की स्थानीय नेताओं में डर भी बना हुआ है। माना जा रहा है कि अब तारिक़ के पसंदीदा नेता और कार्यकर्ता ही कांग्रेस के जिला अध्यक्ष से लेकर प्रदेश स्तर की टीम में शामिल होंगे। और यही कारण है कि तारिक़ के आगमन के बाद कांग्रेस में उनके विरुद्ध विरोध के सुर उभरने लगे। वहीं कई बिहार कांग्रेस के बड़े नेता तारिक अनवर के कांग्रेस में वापसी का स्वागत भी कर रहे हैं। वैसे आज तारिक़ के स्वागत में पार्टी कार्यालय राजेन्द्र आश्रम में कांग्रेस ने जोरदार तैयारी कर रखी है। परंतु चर्चा है कि इस स्वागत तैयारी में भी विरोध के स्वर देखने और सुनने को मिल सकता है।

तारिक अनवर कांग्रेस के पुराने खिलाड़ी माने जाते रहे हैं । कांग्रेस में तारिक़ अनवर की वापसी को लेकर चर्चा करीब दो साल से ही चल रही थी। लेकिन तारिक अनवर अगर 02 साल पहले कांग्रेस में गए रहते तो एनसीपी से इस्तीफा देकर जाना पड़ता इस तरह से इस्तीफे के बाद दल बदल कानून के तहत उनकी संसद पद की सदस्यता चली जाती और ऐसी स्थिति में कटिहार लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना तय था। लेकिन तारिक अनवर ने बड़ी समझदारी से काम लेते हुए लोकसभा चुनाव से करीब 5-6 महीना पहले एनसीपी से इस्तीफा देकर कांग्रेस में वापस हो गए।

ये बात है कि अगर तारिक अनवर कटिहार लोकसभा सीट से एनसीपी से चुनाव लड़ते तो उन्हें दो मुस्लिम चेहरे चुनाव में परेशान कर सकते थे। यह चर्चा इस बार जोरों पर थी कि कांग्रेस , तौकीर आलम , और पूनम पासवान शकील अहमद खान को लोकसभा से प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा सकती है जो कि तारिक़ अनवर के लिये बेहतर नही कहा जा सकता था। इससे तारिक़ अनवर को कहीं ना कहीं नुकसान होने का भी डर था। चूँकि 1999, 2004 और 2009 में चुनाव हारने का कारण भी कांग्रेस, राजद तथा लोजपा के द्वारा मुस्लिम प्रत्याशी ही रहे हैं। और इस चुनाव में इसकी सुगबुगाहट भी तेज हो चुकी थी। कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान फिलहाल कदवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। जबकि युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव तौकीर आलम इस बार तारिक अनवर को चुनाव में ताल ठोकने को लेकर तैयार थे। और निश्चित तौर पर अगर ये तीन नेता तारिक अनवर के विरुद्ध उम्मीदवारी ठोक देते तो ऐसे में तारीक अनवर को यह चुनाव जीतना आसान नहीं होता।

इसलिए तारिक़ अनवर ने अपनी राजनैतिक बाजी खेलते हुए कांग्रेस में ही एंट्री मार दी जिसे पार्टी में कटिहार सीट से उठ रही कांग्रेसी उम्मीदवारी की मांग एक झटके में ही खत्म हो गया। अब कटिहार सीट पर कांग्रेस की ही उम्मीदवारी होगी और उम्मीदवार सिर्फ तारिक अनवर होंगे यह साफ और स्पष्ट हो गया है। बताया जाता है कि पिछले दिनों कटिहार में तारिक़ अनवर और तेजस्वी की राजनैतिक प्रेम भी इसी की एक झलक थी।। इसलिए अब कटिहार लोकसभा क्षेत्र से फिलहाल तारिक अनवर के टक्कर में कोई बड़ा मुस्लिम लीडर भी नहीं बचे है जो तारिक अनवर को चुनाव में नुकसान पहुंचा सके। जहां तक सवाल अहमद अशफ़ाक करीम का है वो अभी राष्ट्रीय जनता दल से राज्यसभा सांसद हैं और आगामी होने वाले लोकसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस का गठबंधन बरकरार रहना तय माना जा रहा है, इसलिए तारिक़ अनवर उधर से भी अब पूरी तरह से आश्वस्त हैं।

तारिक़ अनवर अपनी राजनैतिक सूझबूझ के जरिए ही अपनी राह को बहुत ही आसान बना लिये। अब देखना यह है इनके सामने जो एन डी ए गठबन्धन के उम्मीदवार होंगे वे कितना मजबूत होंगे और कितनी जोरदार टक्कर तारिक अनवर को दे पाएंगे।