हज़रत मौलाना वली रहमानी,अमीर-ए-शरीयत,बिहार-झारखंड-उड़ीसा को खुला खत

हज़रत मौलाना वली रहमानी साहब,
अस्सलामोअलैकुम व.र.ब।

मैं एक अदना सा हिंदुस्तानी हूँ जो समाज में होनी वाली सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हलचलों पर नज़र रखता है। मेरी रुचि धार्मिक हलचलों में कम होती है और मेरा ऐसा मानना है जो जिस क्षेत्र में जानकारी और समझ रखता हो उसको उस काम में आगे बढ़कर ब्यक्ति, समाज और देश निर्माण का काम करना चाहिए। मेरा स्पष्ट मानना है कि देश में इस समय बड़े बड़े उलेमा-ए-कराम मौजूद हैं और बिला शक आप भी उनमें से एक हैं। अब आप एक आलिम के तौर पर समाज और देश के लिए कितना कारगर साबित हुए हैं इसका आकलन मैं इस देश के लोगों विशेषकर मुसलमानो के ऊपर छोड़ता हूँ। लेकिन आपने Rahmani 30 से जो काम किया है वो अपने आप में एक प्रशंसनीय कार्य है और इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं।

मेरी निजी राय जिससे बिहार के अक्सर पढ़े लिखें लोग सहमति रखते हैं, आपके कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। इस प्रश्नचिन्ह का मज़बूत आधार भी है जिसपर मैं कभी और लिखूंगा। मेरा इस खुले खत को लिखने का कारण विगत कुछ दिनों से आपके द्वारा कभी आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बैनर से और कभी इमारत-ए-शरिया के बैनर से ‘दीन बचाओ देश बचाओ’, ‘शरीयत तहफ़्फ़ुज़’ और ‘दिनी व इस्लाही’ जैसे प्रोग्राम कराने पर है। इस समय देश की जो स्थिति है ऐसी स्थिति में मुसलमानो का कोई भी धार्मिक प्रदर्शन साम्प्रदायिक ताक़तों का ध्रुवीकरण कर उनको एकजुट करने में मददगार साबित होगा ऐसा मेरा और मेरे साथियों का मानना है। होना तो ये चाहिए था कि आप अगले लोकसभा चुनाव तक खामोश रहकर देश में कैसे आपसी सद्भाव बना रहे उसके लिए ज़मीनी स्तर पर काम करते, बिहार-झारखंड-उड़ीसा के दंगा पीड़ित लोगों की क़ानूनी लड़ाई लड़ते लेकिन उसकी जगह आप और आपके लोग शरई और इस्लाही कार्यक्रमो के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। पिछले वर्ष से लेकर अबतक बिहार के लगभग 15 ज़िलों में साम्प्रदायिक दंगे हो चुके हैं लेकिन आपने कभी इसपर खुलकर मज़बूती के साथ अपनी बात नही रखी। किसी किसी ज़िले में खानापूर्ति करने के लिए आपका एक ऐसा कारकुन भेज दिया जाता है जिसको रिपोर्ट का ‘र’ और कानून का ‘क’ नही पता।

क्या आप बिहार-झारखंड-उड़ीसा के सेवानिवृत्त जजों, पुलिस अधिकारियों और बड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं की लीगल टीम बनवाकर ‘फैक्ट फाइंडिंग’ या ‘पीपल ट्रिब्यूनल’ जैसा काम नही कर सकते? लेकिन आपको बजाए ये सब काम कराने के ऐसे कार्यक्रमों में अधिक रुचि है जिससे राजनीतिक लाभ लिया जा सके और 15 अप्रैल 2018 के दीन बचाओ देश बचाओ कार्यक्रम से ये साबित हो चुका है। आपने राज्य भर और देश के कोने कोने से मुसलमानो को जमा किया, लोगों के मुताबिक अरबों का चन्दा हुआ और शाम होते होते अपने आदमी को एम एल सी बनवा लिया। ये बात सर्वविदित है। इससे मुसलमानो का भरोसा इमारत और उलेमाओं पर कमज़ोर हुआ है जो अंततः मुस्लिम समाज का नुकसान है।

इतने पर भी ये सिलसिला बन्द नही हो रहा है। अब आप हर शहर में अपने उसी एम एल सी के साथ ‘इस्लाही कॉन्फ्रेंस/इस्लाही प्रोग्राम’ के नाम पर प्रोग्राम करने जा रहे हैं जिसको लोग ‘दीन बेचवा’ एम एल सी का तमगा दे चुके हैं। लोगों में भारी रोष है। मुसलमान 15 अप्रैल के प्रोग्राम के बाद ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सीतामढ़ी के दंगे के बाद इमारत की तरफ से मात्र एक ब्यक्ति का जाना, उसकी रिपोर्ट में मुआवज़ा दिलाने और FIR दर्ज कराने का सेहरा इमारत को देना भी एक झूठ साबित हो चुका है। आपके बनाये एम एल सी द्वारा सीतामढ़ी दंगे को अफवाह बताना भी लोगों के सामने है। सच्चाई ये है कि अबतक वहां न ठीक से FIR हुआ है न कातिलों की गिरफ्तारी हुई है। Indian Express द्वारा जारी खबर में वहां के एस पी ने साफ माना है कि हम दंगा में मारे गए जैनुल अंसारी कातिलों की पहचान नही कर पाए हैं। बल्कि पुलिस कप्तान ने यहां तक कह दिया है कि हम उस जली हुई लाश की शनाख्त नही कर पाए हैं। जब शनाख्त नही तो मुआवज़ा कैसे मिला? और आपलोग मात्र एक रिपोर्ट पर मुसलमानो की ज़िम्मेदारी से हाथ झाड़ लेते हैं। पिछले सालभर के दंगे के बाद से लगातार आपकी चुप्पी सरकार को कहीं न कहीं बचाने का खुला संकेत है।

ऐसे में आपके द्वारा जगह जगह किये जा रहे इन प्रोग्रामों से मुसलमानो में बेचैनी पैदा हो रही है। मुसलमानो का एक बड़ा हिस्सा आपको सरकारी मौलाना होने का इल्जाम लगा रहे हैं वहीं आपके चाहने वाले कुछ लोग आपके बचाव में खड़े नजर आते हैं। ऐसी स्थिति में मुसलमान सामाजिक और राजनीतिक रूप से विभाजित हो रहा है जो भारत के सेक्युलरिज़्म की लड़ाई के लिए आत्मघाती है। 2019 का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है और सेक्युलर वोटों का बंटवारा किसी भी हाल में रोकना होगा। आपका प्रभाव देश भर में है और ये बंटवारा देश की सेक्युलर राजनीति को भी प्रभावित करेगा।

अतः हज़रत मौलाना से मेरा विनम्र निवेदन है कि भाजपा गठबंधन के नेताओं द्वारा सुसज्जित किसी भी मंच पर जाने से परहेज़ करें। इसी योजना की एक कड़ी ढाका में 19/20 नवंबर को हो रहा प्रोग्राम है। ढाका, पूर्बी चम्पारण में हो रहे प्रोग्राम के कारण स्थानीय लोगों में जबर्दश्त आक्रोश है और मुसलमान दो धड़ों में बंटने की कगार पर है। इस बंटवारे को अगर कोई रोक सकता है तो वो आप हैं और अगर नही रोक पाए तो इस बंटवारे के ज़िम्मेदार भी आप ही होंगे। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि अपना प्रोग्राम स्थगित कर मुसलमानो के इस बंटवारे को रोकने में उम्मत की मदद करें। बल्कि मेरा आपसे ये भी विनम्र निवेदन होगा कि लोकसभा चुनाव तक आप राजनीतिक जलसों और धरना प्रदर्शन से हटकर हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव पर देश भर मुहिम चलाएं।

धन्यवाद।

तनवीर आलम
प्रेसिडेंट
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र, मुम्बई।
मोब- +91-9004955775