एशिया के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद को बताया आतंक का गढ़:गिरिराज का विवादित बयान

गिरिराज ने इस्लाम के सबसे सम्मानित शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद को बनाया निशाना, बताया आतंक का गढ़
देवबंद पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जहां एक ओर दारुल उलूम देवबंद को आतंकवाद का गढ़ बताया वहीं, दारुल उलूम से हाफिज सईद और बगदादी को जोड़ते हुए इसे उन्हें इस संस्थान का छात्र बता दिया

मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दो संप्रदायों के बीच खाई पैदा करने वाला एक बेहद विवादित बयान दिया है. उन्होंने यूपी के सहारानपुर में स्थित एशिया के सबसे सम्मानित शिक्षण शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद को आतंक का गढ़ करार दिया है. गिरिराज सिंह ने कहा कि सहारनपुर के बारे में पता नहीं, दारुल उलूम देवबंद शिक्षा का मंदिर है या आतंक का. गिरिराज ने पाकिस्तानी के आतंकी हाफिज सईद और आईएसआईएस के चीफ अबु बक्र अल बगदादी को दारुल उलूम देवबंद का छात्र करार दिया

गिरिराज के इस बायन से देवबंद के उलेमा काफी गुस्से में हैं. उन्होंने कहा, “हमारा उनको मशवरा है कि वो दारुल उलूम में दाखिला लें और तालीम हासिल करें और फिर देखें कि यहां किस चीज की शिक्षा दी जाती.’ उलेमा ने आगे कहा, ” हाफिज सईद और बगदादी का दारुल उलूम से कोई संबंध नहीं और यह बात या तो वो साबित करें, वरना पूरे देश के सामने माफी मांगे.”

देवबंद पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयान से आहत उलेमा ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, “मंत्री जी हमेशा ही जहरीले बयान देकर मुल्क का माहौल खराब करना चाहते हैं. वो चाहते हैं कि हिंदू-मुस्लिम को बांटा जाए और हम चैलेंज के साथ उन्हें आज यह कहते हैं कि बगदादी और हाफिज सईद ने यहां शिक्षा हासिल नहीं ली है.”

उलेमा का कहना है कि हाफिज सईद और बगदादी को लेकर वो अपने दावे को साबित नहीं कर पाते तो उन्हें देवबंद वासियों से माफी मांगनी चाहिए और इस तरह का जो घटिया और जलील बयान उन्होंने दिया है, इसे वापस लेना चाहिए. ये भी कहा गया कि वो देवबंद ही नहीं दिल्ली या हिंदुस्तान के किसी कोने में देबवंद से पढ़े छात्रों से बात करना चाहें या डिबेट करना चाहें तो वो उनकी बात का जवाब देने के लिए हर कोने में हाजिर हैं. लेकिन उन्हें अपने शर्मनाक बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए.

उलेमा का कहना था कि हिंदुस्तान का मुसलमान इस देश का किराएदार नहीं हिस्सेदार है. देवबंद में आकर इस तरह का बयान देने का मतलब है सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को डराने की कोशिश है. इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना उनके लिए अच्छा नहीं है. उनको इस तरह के शब्दों को वापस लेकर माफी मांग लेनी चाहिए और ये उनके लिए बेहतर होगा.