सीतामढ़ी दंगे पर प्रशासन और मीडिया का खतरनाक गठजोड़

तनवीर आलम: सीतामढ़ी दंगे को आज 41 दिन गुज़रने वाले हैं। इन 41 दिनों के घटनाक्रम को अगर विस्तार से देखा जाए तो शुरू से लेकर अब तक प्रशासन और मीडिया का रवैया बहुत स्पष्ट नही है। या मीडिया को प्राशासन से जो खबरें जा रही हैं वो स्पष्ट नही हैं। शुरू के एक सप्ताह तक मुख्य धारा की मीडिया इस मामले से लगभग बे खबर रही। 20 अक्टूबर 2018 के आजतक की रिपोर्ट में जैनुल अंसारी की हत्या का ज़िक्र तक नही है। आजतक लिखता है ‘बिहार: सीतामढ़ी में मूर्ति विसर्जन को लेकर दो गुटों में झड़प, इंटरनेट सेवा बंद’। आजतक की इस रिपोर्ट में न दुकानों के जलाने का ज़िक्र है न लूटपाट का न हत्या का। साफ है मीडिया प्रशासन का बचाव करती नज़र आ रही है।

https://m.aajtak.in/crime/crime-news/story/bihar-sitamarhi-communal-tension-section-144-imposed-atrc-1036174-2018-10-20-

उसके बाद 25 नवंबर से सोशल मीडिया पर कुछ समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने लिखना शुरू किया। The Quint 1 नवंबर को लिखता है:
’38 Nabbed for Lynching in Bihar’s Sitamarhi During Durga Puja ‘। इसमे प्रशासन की ओर से 6 FIR और 38 गिरफ्तारी का ज़िक्र है।

https://www.thequint.com/news/webqoof/clashes-durga-puja-bihar-sitamarhi

6 नवंबर को NewsCentral24x7 की रिपोर्ट में भी 6 FIR और 38 गिरफ्तारी का ज़िक्र है। NewsCentral24x7 लिखता है ‘एसपी विकास बर्मन का कहना है कि हमने 38 लोगों को गिरफ़्तार किया है. वही, सीतामढ़ी थानाध्यक्ष शशिभूषण सिंह का कहना है कि हमने 31 लोगों कोहिरासत मेंलिया है’

Exclusive : “एक घंटे का समय दीजिए, सभी मुसलमानों को ख़त्म कर देंगे..”, सीतामढ़ी में जब भीड़ ने ज़ैनुल अंसारी को ज़िंदा जला दिया- Ground Report

6 नवंबर को ही The Wire (English) और BBC (Hindi) की रिपोर्टों में गिरफ्तारी को लेकर कोई खबर नही है।

खोजी पत्रकारिता के लिए मशहूर Indian Express अपने 10 नवम्बर के पटना संस्करण में लिखता है:
‘Bihar: 82-year-old killed in communal clash 3 weeks ago, no FIR, no leads’

इसमें इंडियन एक्सप्रेस सीतामढ़ी एस पी का बयान भी छापता है:
“Zainul Ansari could have been attacked when he was returning. a sudden sporadic momentary emotional outburst. He was beaten up and died. We will look into how his body was charred. Though we have not lodged a separate case in Zainul’s death, we have filed a case of serious rioting in which murder section is also added for recovery of a body against unknown accused,” said Sitamarhi Superintendent of Police Vikas Barman.

Sitamarhi police have filed overall six FIRs for Dussehra violence and also arrested 38 people but none specifically for Ansari murder. “We have not yet identified anyone, nor have we found involvement of any kind of group,” said the officer.’

सीतामढ़ी एस पी के बयान से साफ है कि 10 नवम्बर तक जो 38 गिरफ्तारियां हुईं उसमें ज़ैनुल अंसारी के हत्या के मामले में न कोई गिरफ्तारी हुई थी न ही हत्या का कोई अलग से FIR ही हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस भी प्रशासन की तरफ से 6 FIR होने की पुष्टि करता है।

https://indianexpress.com/article/india/82-year-old-killed-in-bihar-communal-clash-3-weeks-ago-no-fir-no-leads/

NDTVKhabar 12 नवम्बर की अपनी रिपोर्ट में लिखता है:
‘बिहार में बुजुर्ग को चौक पर जिंदा जलाया, पुलिस कार्रवाई के लिए कर रही छठ पूजा बीतने का इंतजार’।

आगे एनडीटीवी लिखता है:
‘बिहार के सीतामढ़ी में 82 वर्षीय बुजुर्ग की भीड़ द्वारा हत्या (मॉब लिंचिंग) के 3 सप्ताह बाद भी अभी तक आरोपी पकड़ से बाहर हैं. पुलिस का कहना है कि अभी उनका पूरा ध्यान छठ के त्योहार पर है’। इसी खबर में आगे एनडीटीवी सीतामढ़ी एस पी विकास बर्मन का बयान लिखता है ‘सीतामढ़ी के एसपी विकाश बर्मन ने कहा कि इस मामले में छठ पूजा के बाद कार्रवाई की जाएगी. अभी पुलिस का पूरा ध्यान बगैर किसी बाधा के शांतिपूर्वक तरीके से छठ संपन्न कराने पर है. एसपी ने कहा कि अभी तक कुल 38 लोग पकड़े गए हैं, लेकिन उनका संबंध हिंसा से है न कि जैनुल अंसारी की हत्या से. दूसरी तरफ, जैनुल अंसारी के परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को एक आरोपी की फोटो भी दी है, लेकिन अभी तक उसकी पहचान नहीं हो पाई है.’

इसी बीच कई संगठनों और अखबारों द्वारा फैक्ट फाइंडिंग टीम जाकर ग्राउंड रिपोर्ट भी बनाती है जिसमें PUCL, All India Muslim Bedardi Karwan, NewsCentral24x7, The Wire और BBC मुख्यरूप से हैं।
इस लेख के माध्यम से जो सबसे महत्वपूर्ण सवाल उठाने की कोशिश की जा रही है वो है 29 नवम्बर को जनसत्ता, इंडियन एक्सप्रेस और द वर्ल्ड न्यूज़ हिंदी में छपी खबरें। इंडिया एक्सप्रेस लिखता है:
‘Sitamarhi mob lynching: Man seen holding Ansari’s hand among 13 held, search on for 6 others’

आगे इंडियन एक्सप्रेस लिखता है:
‘A day after Dussehra, a Muslim-dominated area in Sitamarhi was on the edge after stone throwers damaged a Durga idol being taken for immersion.’
जबकि FIR में या प्रशासन की तरफ से कहीं ज़िक्र नही की दुर्गा जी की मूर्ति को कोई क्षति हुई है।

https://indianexpress.com/article/india/sitamarhi-mob-lynching-man-seen-holding-ansaris-hand-among-13-held-search-on-for-6-others-5469919/

जनसत्ता लिखता है:
मुस्लिम की जलाकर हत्या: बुजुर्ग का हाथ पकड़े रहने वाले शख्स समेत 13 गिरफ्तार
गिरफ्तार किए गए सभी युवकों की उम्र 20 साल के आसपास है और वे बेरोजगार हैं। किसी युवक का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है। आगे जनसत्ता लिखता है ‘थाना इंचार्ज ने आगे कहा, “गिरफ्तार किए गए सभी युवकों की उम्र 20 साल के आसपास है और वे बेरोजगार हैं। वे स्थानीय हैं। इस घटना का मास्टरमाइंड कोई और हो सकता है जो मौके पर नहीं देखा गया। हालांकि, गिरफ्तार किए गए किसी युवक का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है।” पुलिस वीडियो फुटेज और फोटो के आधार पर छह अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।’

सीतामढ़ी: मुस्लिम बुजुर्ग को जिं’दा ज’लाने के मामले में 13 आरोपी गिरफ्तार

https://www.jansatta.com/rajya/bihar/man-seen-holding-ansari-hand-among-13-arrest-in-sitamarhi-mob-lynching-case/831856/

द वर्ल्ड न्यूज़ हिंदी लिखता है:
सीतामढ़ी: मुस्लिम बुजुर्ग को जिं’दा ज’लाने के मामले में 13 आरोपी गिरफ्तार

आगे द वर्ल्ड न्यूज़ हिंदी लिखता है ‘थाना इंचार्ज ने आगे कहा, “गिरफ्तार किए गए सभी युवकों की उम्र 20 साल के आसपास है और वे बेरोजगार हैं। वे स्थानीय हैं। इस घटना का मास्टरमाइंड कोई और हो सकता है जो मौके पर नहीं देखा गया। हालांकि, गिरफ्तार किए गए किसी युवक का कोई अपराधिक इतिहास नहीं है।” पुलिस वीडियो फुटेज और फोटो के आधार पर छह अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।’

सीतामढ़ी: मुस्लिम बुजुर्ग को जिं’दा ज’लाने के मामले में 13 आरोपी गिरफ्तार

29 नवम्बर को तीनों अखबारों इंडियन एक्सप्रेस, जनसत्ता और द वर्ल्ड हिंदी न्यूज़ को अगर बारीकी से पढ़ी जाए तो ऐसा लगता है तीनो खबर एक ही डेस्क से बनी है।

सबसे ध्यान देने योग्य बात जो है वो ये की 20 अक्टूबर से लेकर अबतक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 38 है। हर बार पुलिस कप्तान द्वारा ज़ैनुल अंसारी के हत्यारों की गिरफ्तारी से नकारा गया है। फिर सवाल है गिरफ्तारों कि संख्या अगर जस के तस है तो अचानक 29 नवम्बर को ज़ैनुल अंसारी के 13 हत्या आरोपियों की गिरफ्तारी कहां से हो गयी और अगर उन्हीं 38 गिरफ्तार लोगों में से 13 को हत्या का आरोपी बनाया गया तो ये 13 लोगों की गिरफ्तारी की नई खबर हुई कैसे? इसका जवाब या तो पुलिस प्रशासन दे सकती या ये तीनो अखबार। लेकिन जिस प्रकार से खबरें बन रही हैं, गिरफ्तार आरोपियों पर प्राशासन द्वारा किसी और आपराधिक मामले में संलिप्त न होने की सफाई दी जा रही है, मूर्ति को क्षति पहुंचाने की खबर गढ़ी जा रही है ये सब देश के इन बड़े अखबारों पर सवालिया निशान तो खड़ा करता ही है।

प्रशासन की भूमिका शुरू से संदिग्ध रही है। स्थानीय अखबार चाहे उर्दू हो या हिंदी उनकी भूमिका भी सरकारी अखबार की रही है। लेकिन देश की मुख्य धारा की इन मीडिया घरानों की ओर से इस प्रकार की पत्रकारिता शंशय पैदा करने वाली है। इसपर बहस होना आवश्यक है। और प्रशासन से खुला जवाब मांगने की भी मांग उठनी चाहिए।

तनवीर आलम
प्रेजिडेंट
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन ऑफ महारष्ट्र, मुम्बई
मोब- +91- 9004955775