अब चीनी सामान नहीं रह जाएंगे सस्ते, पढ़ें क्यों

सस्ते सामान के बल पर दुनियाभर के बाजारों पर राज करने वाले चीन की बादशाहत जल्द खत्म होने वाली है। पिछले तीन साल में मजदूरी दोगुना बढ़ने और गुणवत्ता पर ध्यान देने की वजह से चीन में बने सामान भी सस्ते नहीं रह जाएंगे।

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जानकार मानते हैं कि इसका सीधा फायदा भारत को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे। चीनी सामान की दुनिया में मांग घटने से भी चीन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहां की कंपनियां दूसरे देशों के बाजार पर कब्जा जमाने के लिए बेहद मामूली मुनाफे पर सामान बेचती रही हैं। चीन के कारोबारियों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा की वजह से पिछले पांच साल में उत्पादों की कीमत में करीब 90 फीसदी तक कटौती कर चुके हैं, लेकिन अब इससे अधिक कमी करने की स्थिति में नहीं है।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सरकार अपने उत्पादकों को सामान बनाने से लेकर निर्यात तक के लिए भारी छूट एवं रियायत देती रही है। लेकिन अब उसे आगे जारी रहना मुश्किल हो गया है। चीन ने पिछले एक साल से अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया है जिससे उसके उत्पाद सस्ते हो जाएं। लेकिन निर्यात पर छूट उन्हीं उत्पादकों को दी जा रही है जो डॉलर में अपने उत्पाद का मूल्य स्थिर रख सकें।

जापान-यूरोप पर भी असर
चीन के उत्पाद महंगे होने का जापान, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया पर भी असर होगा। चीन जापान को 25%, जबकि ऑस्ट्रेलिया 23% आयात करता है। चीन से आयात महंगा होने से इन देशों में बने उत्पाद भी महंगे होंगे साथ ही मांग में कटौती करेंगे।

घटिया उत्पाद नहीं बनेंगे
उत्पादों की गुणवत्ता खराब होने से अमेरिका, यूरोप और दुनिया के अन्य बाजारों में चीन के सामान की मांग घटी है। इसे देखते हुए चीन गुणवत्ता में सुधार पर खासा ध्यान दे रहा। लेकिन इससे लागत ऊंची हो जा रही है।

भारत में चीनी सामान की बिक्री 60 फीसदी घटी

भारत में इस साल दिवाली पर चीनी सामानों की बिक्री में 60 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। सोशल मीडिया पर चीनी सामानों के बहिष्कार अभियान के बीच व्यापारिक अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने सोमवार को यह बात कही। कैट ने विभिन्न बड़े शहरों में कराए गए सव्रेक्षण के आधार पर कहा कि व्यापारियों ने भी चीनी सामानों को बेचने में कम रुचि दिखाई। कैट के मुताबिक चीनी सामानों के स्थान पर लोगों ने मिट्टी के दिए और कागज, प्लास्टिक इत्यादि से बने देसी सजावटी सामान खरीदे। संगठन ने यह आंकड़े 20 शहरों में किए सव्रेक्षण के आधार पर जारी किए हैं।