नोटबंदी: आपको ये तीन बड़ी खबरें जरूर पढ़नी चाहिए

नई दिल्ली
मिल्लत टाइम्स/ एबीपी न्यूज |
२३/११/२०१६

नई दिल्ली: नोटबंदी के बीच आपके लिए बड़ी राहत की खबर आई है. देश के सबसे बड़े रिटेल स्टोर बिग बाजार में आप परसों से अपने डेबिट कार्ड के जरिए दो हजार रुपये निकाल सकते हैं. बिग बाजार के मालिक किशोर बियानी ने ट्वीट करके ये जानकारी दी है. देश के सभी छोटे-बड़े शहरों के बिग बाजार में ये सुविधा मिलेगी. 2001 में खुले बिग बाजार की देश भर में 200 से ज्यादा स्टोर हैं.

नोटबंदी को लेकर आज तीन बड़ी खबरें हैं. पहली-स्टोर बिग बाजार में आप परसों से अपने डेबिट कार्ड के जरिए दो हजार रुपये निकाल सकते हैं. दूसरी-500 और 1000 रुपये के पुराने नोट छोटी बचत योजनाओं में जमा नहीं किए जा सकते हैं. तीसरी और सबसे अहम शादी पर सरकार के सात वचन है. 

उधर वित्त मंत्रालय ने किया साफ
– 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट छोटी बचत योजनाओं में नहीं किए जा सकते हैं जमा
– बैंक और डाकघरों को निर्देश जारी किए
– छोटी बचत योजनाओं के तहत खोली गए खातों के लिए ये निर्देश मान्य
– छोटी बचत योजनाओं में एनएससी, पीपीएफ, सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम, डाकघर बचत योजनाएं मुख्य रुप से शामिल

शादी पर सरकार के सात ‘वचन’

शादी वाले घरों को बैंक से ढाई लाख रुपए निकालने के नियम में सरकार ने अब एक राहत दी है. अब दस हजार रुपए से ज्यादा का जिन्हें पेमेंट करना है उन्हीं से जुड़ा हलफनामा देना होगा कि इसका बैंक अकाउंट नहीं है. जबकि इससे पहले नियम था कि जिन जिन लोगों को पेमेंट देना है, उनके बारे में बताना होगा कि इनका बैंक अकाउंट नहीं है.

आरबीआई की गाइडलाइन सात फेरों, सात वचन से भी भारी है. शादी करनी है तो आरबीआई के सामने शादी वाले परिवार को स्टैंप पेपर पर सात वचन देने पड़ेंगे कि शादी काला धन का जरिया नहीं बनेगी.

पहला वचन
ढाई लाख तभी मिलेंगे जब रकम अकाउंट में 8 नवंबर से पहले जमा हों.

पहले वचन का मतलब
8 नवंबर के बाद जमा पैसे शादी के नाम पर नहीं मिलेंगे.

दूसरा वचन
शादी 30 दिसंबर तक हो जानी चाहिए.

दूसरे वचन का मतलब
शादी 30 दिसंबर के बाद हुई पैसे नहीं मिलेंगे.

तीसरा वचन
शादी वाले परिवार का एक ही सदस्य ढाई लाख निकाल सकता है.

तीसरे वचन का मतलब
कोई रिश्तेदार-दोस्त मदद नहीं कर सकता.

चौथा वचन
दूल्हे का परिवार और दुल्हन का परिवार अलग अलग ढाई लाख निकाल सकते हैं

चौथे वचन का मतलब
शादी वाले दो परिवार एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं.

पांचवां वचन
बड़ा खतरनाक है पांचवां वचन. जिनके यहां शादी है वो लिखवाकर देंगे कि जिनको पैसे दे रहे हैं उसके पास बैंक अकाउंट नहीं है.

पांचवें वचन का मतलब
हलवाई, टेंट, बैंड वाले को कैश में पेमेंट करेंगे तो उनसे ये लिखवाना होगा कि उसके पास बैंक अकाउंट नहीं है.

छठा वचन
कैश में पेमेंट की रसीद लेनी होगी.

छठे वचन का मतलब
हलवाई वाले, टेंट वाले, बैंड वाले से पक्की रसीद लेनी होगी.

सातवां वचन
शादी के कार्ड का सबूत देना होगा. एडवांस पेमेंट की रसीद देनी होगी.

सातवें वचन का मतलब
पहले शादी के लिए खर्च कीजिए. पैसे बाद में मिलेंगे.

शादी के लिए आदमी पीएफ से पैसे निकालता है. दफ्तर से एडवांस लेता है. इधर उधर से उधार लेता है. जीवन की गाढ़ी कमाई जमा करता है बच्चों की शादी के लिए. यहां तक तो सब सफेद धन यानी ऑडिडेट मनी हो सकती है लेकिन शादी में दूल्हे को खुश करने के लिए होने वाले खर्च से लेकर, शगुन की लेन देन, हलवाई, टेंट, डेकोरेटर, पंडित की दक्षिणा, सालियों की नेग सब बिना खाता-बही के होता है.

गाइडलाइन से साफ है कि सरकार मान रही है कि शादियों में बड़े पैमाने पर काले धन का लेन देना होता है. शादी करने वाले परिवार भले सफेद धन से शादी करता हो लेकिन उसके हाथ से जैसे ही शादी का खर्च शुरू होता है वो काला धन बनता जाता है क्योंकि हलवाई, टेंट वाला, फूल वाला कैश में मोटा पैसा लेता है जिसका न तो हिसाब सरकार को नहीं देता है, न टैक्स. शादियां कराने वाले इवेंट मैनेजर्स या तो पूरा पैसा कैश में लेते हैं या आधा कैश या आधा चेक से लेते की शर्त रखते हैं.

लाखों-करोड़ों में होने वाली शादियां में सबको कुछ न कुछ मिलता है. सिवाय सरकार के. सरकार अब कह रही है कि शगुन भी चेक से दो. सबको या तो चेक से पेमेंट करो या सबसे रसीद मांगों.