बाबरी मस्जिद के स्थान पर मंदिर के निर्माण के लिए अनिश्चित मांग हिंदुओं की नहीं है, यह केवल मुट्ठी भर फांसीवादी संगठनों का राजनीतिक एजेंडा है: अहमद बैग नदवी

नई दिल्ली,प्रेस विज्ञप्ति,17 सितंबर, 2018,इंसाफ पसंद हिंदू 500वर्षीय शाहिद मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर की बजाय बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण करना चाहता है। अहमद बैग नदवी
ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अहमद बैग नादीद ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा के: “चुनाव का अवसर करीब आते ही फांसीवादी जमातों को को” राम मंदिर “याद याद आना शुरू हो जाता है। राम मंदिर हिन्दुवों का इशू नहीं है . न हिन्दुवों को अज़ान से तकलीफ है न मुसलमानों को भजन से। मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर के निर्माण की मांग किसी भी इंसाफ पसंद हिंदू का नहीं है। यह देश में मुट्ठी भर फांसीवादी जमातों का एकमात्र राजनीतिक एजेंडा है ”

राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अहमद बैग नदवी ने कहा :”बाबरी मस्जिद 1949 तक मस्जिद थी। इख्तिलाफ मात्र मस्जिद के सामनेवाले चबूतरा के बारे में था। बाद में फांसीवादी जमातों ने इसे राजनीतिक हित के लिए इसमें ज़बरदस्ती मूर्ति रखवाया, और फिर 6 दिसंबर 1992 को मुनज़्ज़म साज़िश करके भगवा आतंकवादियों ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए पांचसो वर्षीय बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया। यह अभी भी एक मस्जिद है और क़यामत तक मस्जिद रहेगी। ” रामजनम भूमी” कभी भी हिंदुओं की समस्या नहीं थी और आज भी नहीं है।

उन्होंने कहा: “जो लोग बाबरी मस्जिद के स्थान पर” राम मंदिर “बनाने के बारे में बात करते हैं, वे भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ वोह, देश के खैरखाह नहीं हो सकते हैं। ये लोग हिंदुस्तानी प्रवृत्तियों को फिर से टुकड़े करने के पीछे हैं। उनके खिलाफ सभी देशवासियों को एक साथ आवाज़ उठाने की ज़रुरत है। ”
आल इंडिया इमाम्स कौंसिल राष्ट्रीय प्रवक्ता मुफ्ती हनीफ अहरार सुपौलवी ने कहा कि: आल इंडिया इमाम्स कौंसिल सभी देशवासियों से चाहती है कि वोह भारतीय संसकृति , यहाँ कि संमिधान और जम्हूरी अक़दार की हिफाज़त कि लिए एकजुट होकर आगे आयें और देश विरोधी ताक़तों, राष्ट्र-विरोधी तत्वों और फांसीवादी जमातों कि खिलाफ एक साथ आवाज़ उठायें।
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एम, एच, अहरार सुपौलवी राष्ट्रीय प्रवक्ता:
आल इंडिया इमाम्स कौंसिल।