मनावाधिकार संगठन NCHRO ने की लखनऊ में तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी

जांच दल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपेगा अपनी जांच रिपोर्ट

लखनऊ (मिल्लत टाइम्स)5नवम्बर। दिल्ली के मानवाधिकार संगठन NCHRO ने साम्प्रदायिक तनाव के बाद गाँव खैरा बाजार इलाके का दौरा कर तथ्य जुटाए थे। संगठन ने आज अपनी जांच विस्तृत रिपोर्ट आज लखनऊ में एक कार्यक्रम में जारी की। संगठन के दिल्ली प्रदेश सचिव एड्वोकेट अन्सार इन्दौरी ने बताया कि इस रिपोर्ट को उत्तरप्रदेश के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गांधी भवन में जारी किया।इस मौके पर जांच दल के सदस्य राजीव यादव और कृपा शंकर शामिल थे। अन्सार इन्दौरी ने बताया कि दल ने अपनी जांच में पाया था कि एफआईआरकर्ता को कोई अस्सी हमलावरों के नाम तो याद है लेकिन अपने घायल साथियों का नाम उसे याद नहीं है।पूरी एफआईआर में जिसका जिक्र नहीं, उस देशविरोधी नारे का वीडियो तीन दिन बाद कहां से आया, ये बढ़ा सवाल है। एफआईआर पढ़ने से लगता है योगी सरकार में घटना से पहले एफआईआर दर्ज हो गई है।

जांच दल का मानना है कि बहराइच के खैरा बाजार सांप्रदायिक तनाव मामले में यूएपीए के तहत दर्ज एफआईआर और विवादित वीडियो को अल्पसंख्यकों के खिलाफ सोची समझी साजिश है। एफआईआर में पुलिस ने यूएपीए के तहत जो मुकदमा दर्ज किया उससे साबित होता है कि मुसलमानों को देश विरोधी घोषित करने का षडयंत्र पहले से तय था। एफआईआर में ऐसा कोई आरोप नहीं था जो यूएपीए के तहत आता हो।

बहराइच जिले के थाना बौंण्डी में 20/10/2018 को दर्ज एफआईआर के अवलोकन से उसमें दर्ज घटना पूरी तरह संदेह के घेरे में है। मुकदमे के आरोपक आशीष कुमार शुक्ला ने तहरीर में घटना का समय नहीं लिखा है। फिर भी प्रथम सूचना रिपोर्ट में घटना का दिनांक तथा समय 20/10/2018 को 00ः00 बजे लिखा है। तो फिर प्रथम सूचना रिपोर्ट 21ः38 पर कैसे दर्ज हो गई। थाना बौंण्डी की पुलिस तथा क्षेत्र के सांप्रदायिक तत्वों ने मिलकर आपस में राय मसवरा करने के बाद फर्जी रिपोर्ट तैयार की है। एफआईआर में कुल 80 व्यक्ति नामजद किए गए हैं और उनके साथ 100-200 की अतिरिक्त संख्या बल बताई गई है जो विश्वसनीय नहीं प्रतीत होती।
यदि ढाई तीन सौ व्यक्ति प्रतिमा विसर्जन यात्रा पर हमला करने के लिए छुपे होते तो किसी व्यक्ति द्वारा देख ही लिए गए होते। ।

घटना के तकरीबन तीन दिन बाद अपर पुलिस अधीक्षक बहराइच द्वारा दिया गया बयान जिले की पुलिस और सांप्रदायिक तत्वों के षडयंत्र को उजागर करता है। आशीष कुमार शुक्ला की एफआईआर में नारेबाजी की घटना नहीं है। अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा तथाकथित वीडियो जारी होने के बाद बयान दिया गया है। यदि घटना वाले दिन कोई नारेबाजी हुई होती तो एफआईआर में उसका जिक्र जरुर किया गया होता।तथाकथित वीडियो वायरल हुआ और तब अपर पुलिस अधीक्षक ने बयान जारी किया।

जांच दल ने यूएपीए के तहत दर्ज किए गए मुकदमे को साजिश का हिस्सा बताया। आशीष कुमार शुक्ला द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कोई ऐसा तथ्य नहीं है जो घटना को आतंवकादी घटना बता सके तो पुलिस ने किस आधार पर यूएपीए की धारा लगाई। यह मुसलमानों को देशद्रोही बताने की भाजपा की साजिश की ताजा कड़ी है।गौरतलब है कि पूरे अवध क्षेत्र में प्रतिमा विसर्जन के दौरान सांप्रदायिक तत्वों के सामने प्रशासन नतमस्तक रहा। बहराइच के खैरा बाजार में सांपद्रायिक तत्वों द्वारा जामा मस्जिद के सामने जुलुस रोककर शोर-शराबे के बीच गुलाल फेंकेने के चलते तनाव हुआ। देखते-देखते दुकानों को निशाना बनाया गया, ईदगाह की दीवार तोड़ दी गई। इस दौरान पुलिस मौजूद रही और वीडियो भी उसने रिकार्ड किया पर गुनहगारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के घरों में दबिश के नाम पर तोड़फोड़ की और मुसलमानों की गिरफ्तारियां की।
संगठन जल्द अपनी विस्तृत रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को भेजेगा।