मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बिहार शेल्टर होम से जुड़े सभी 17 मामलों को सीबीआई के हवाले कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि बिहार पुलिस अपना काम नहीं कर रही है. साथ ही निर्देश दिया कि जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी का तबादला नहीं किया जाए.
कोर्ट ने बिहार सरकार की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें उसने जवाब दाखिल करने लिए और समय की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई सभी मामलों की जांच के लिए तैयार है. अब सीबीआई ही शेल्टर होम से जुड़े सभी मामलों की जांच करेगी.
कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले को लेकर बिहार सरकार का रूख नरम है. कोर्ट ने बिहार सरकार को 24 घंटे में एफआईआर में बदलाव करने के लिए कहा है. इसके साथ ही मुख्य सचिव को भी आदेश दिए हैं कि वे सुनवाई के दौरान कोर्ट में ही मौजूद रहें. बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए, ‘मई में रिपोर्ट आई और आपने अब तक इस पर क्या एक्शन लिया? आपका रवैया ऐसा है कि अगर किसी बच्चे के साथ दुराचार होता है तो आप जुवेनाइल बोर्ड के खिलाफ ही कार्रवाई कर देंगे?’
सुप्रीम कोर्ट की फटकार पर बिहार सरकार की ओर से कहा गया कि वो अपनी गलतियां सुधारेंगे. इसके साथ ही बिहार सरकार की ओर से कहा गया, ‘सभी शेल्टर होम एक ही अथॉरिटी के अंतर्गत हों इसके लिए सरकार कदम उठा रही है. बिहार सरकार को जैसे ही शिकायत मिली, तुरंत कार्रवाई शुरू की.’
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की फटकार को मुद्दा बनाकर विपक्षी पार्टी आरजेडी ने बिहार सरकार को घेरा है. तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर लीपा-पोती कर इस मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
बता दें कि 2018 के शुरुआत में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई (TISS) ने अपने सोशल ऑडिट के आधार पर मुजफ्फरपुर के साहु रोड स्थित बालिका सुधार गृह में नाबालिग लड़कियों के साथ कई महीने तक रेप और यौन शोषण होने का खुलासा किया था.
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