दिल्ली का रासता यूपी,बिहार से गुज़रता है गुजरात से नही :ज़िशान नैयर

M Qaisar Siddiqui

M Qaisar Siddiqui

09 October 2018 (Publish: 01:01 PM IST)

मिल्लत टाइम्स:गुजरात में जिस योज़ना बध तरीक़े से बिहार और यूपी वालों को भगाया जा रहा है ,उससे 2002 सम्प्रदायिक दंगों की छोटी बहन कह सकतें हैं? फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि वो मुसलमान थे,और ये ग़रीब मज़दूर हैं जो तथाकथित गुजरात मॉडल बनाने में इनका योगदान सबसे ज़्यादा है अग़र ये लोग गुजरात में ना होते तो जिस ढिंढोरे के साथ गुजरात मॉडल का प्रचार करके मोदी जी प्रधानमंत्री बने वो सायद आज दिल्ली की बजाय गांधीनगर में ही होते,

याद कीजिये 2014 चुनाव से पहले जब यही मज़दूरों को गुजरात से बाहर गुजरात मॉडल का प्रचार करने अपने राज्य गये थे और गुजरात मॉडल की तारीफ़ में कसीदे पढ़ रहे थे,कहाँ है यूपी का गोद लिया हुआ बेटा कहाँ है माँ गंगा का बुलाया हुआ बेटा आज जब यूपी और बिहार वालों पे हमला हो रहा है वो गुजरात छोड़ने पे मज़बूर हैं तो प्रधानमंत्री का बयान ना आना दुःखद है? वैसे 56 इंच वाले प्रधानमंत्री संवेदनशील मसले पे बोलते भी कम ही हैं चाहे मोब लीनचिंग हो या गौ रक्षा कितनी बार उन्होंने अपना मुँह खोला है? इसमें कोई शक़ नही प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यकाल के सबसे कमज़ोर दौऱ से गुज़र रहें हैं , 4 साल फहले 125 करोड़ जनता से जो वादे किए थे शायद ही कोई वादा पूरा किया हो,ख़ुद को भष्ट्राचार मुक्त खाने वाले आज सबसे बड़े घोटाले में घिरते नज़र आ रहें हैं और तो और जब ख़ुद को फंसते या कमज़ोर पाते हैं तो धार्मिक राग या इमोशनल अटैक पे आ जातें हैं कब्रिस्तान शमशान उदाहारण है , और तो 1990 से उनके घोषणा पत्र में राम मंदिर का ज़िक्र है, लोकसभा और राज्यसभा में बम्पर बहुमत के बाद भी चुप्पी साधे थे आज अचानक से राम मंदिर की याद आई और हरकत भी शुरू हो चुकी है, 2013 में मीडिया के ज़रिये मोह भंग करके सत्ता हासिल तो कर ली लेक़िन उनकी उम्मीदों पे आज् भी खरेे साबित नही हो पाए, आगामी 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव अच्छे दिनों के जनमतसंग्रह साबित हो सकता है?जैसा के कुछ टीवी चैनलों के ओपिनियन पोल सर्वे इस बात की तरफ़ इशारा कर रहें हैं ,

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई ने एक बार कहा था हो सकता है कि 2002 की वज़ह से हमें 2004 में सत्ता से बाहर होना पड़ा, अग़र यही बिहार यूपी वालों का पलायन नही रुका और किसी तरह आम चुनाव में मुद्दा बनना तो यूपी बिहार के 120 में 100 से ज़्यादा सीट जीत कर दिल्ली दरबार में सुख भोगने वाले 2019 में दिल्ली दरबार से रुख्सत भी हो सकतें हैं वैसे अभी आम चुनाव में 6,7 महीने का वक़्त है इंतेज़ार कीजिये?

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