नई दिल्ली ( 26 सितंबर): अयोध्या मामले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को फैसला सुनाएगा। कोर्ट ये तय करेगा कि सुप्रीम कोर्ट का 1994 के 5 जजों के इस्माईल फारुखी जजमेंट को दोबारा सुनने की जरूरत है या नहीं। इस्माईल फारुखी जजमेंट में कोर्ट ने कहा था कि ‘मस्ज़िद इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है।’
क्या है इस्माइल फारुखी मामले में कोर्ट का फैसला और अयोध्या भूमि विवाद से क्या है संबंध –
– जब हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई, मुस्लिम पक्षकारों ने मांग की थी कि इस मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच को नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये मस्जिद की जमीन से जुड़ा है और इस फैसले से धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर प्रभाव पड़ सकता है।
हिन्दू पक्षकारों के तरफ से इसका विरोध करते हुए दलील दी गयी थी कि बड़े बेंच को सुनने की जरूरत नहीं है क्योंकि 1994 के इस्माइल फारुखी जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने ये तय कर दिया था कि मस्जिद इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग नहीं है !
– मुस्लिम पक्षकारो के तरफ से दलील दी गयी कि मस्जिद को इस्लाम से अलग नहीं देखा जा सकता, इस्माइल फारुखी मामले में कोर्ट के फैसले पर दोबारा विचार किये जाने की जरूरत है।
मुख्यन्यायाधीश की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने इस मांग पर कि इस्माइल फारुखी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दोबारा विचार करने की जरूरत है या नहीं ,दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 22 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अगर कोर्ट इस्माइल फारुखी मामले में पांच जजों के फैसले की समीक्षा के लिए तैयार हो जाता है तो मामला बड़े बेंच यानि सात जजों की बेंच को सौंपा जाएगा और वह बेंच पहले यह तय करेगी कि ‘मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है या नहीं!’ और उसके बाद ही अयोध्या मामले में अपील पर सुनवाई हो सकेगी।
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