बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के उन्नाव से सांसद ने कहा कि दिल्ली स्थित जामा मस्जिद को तोड़ दो और यदि मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे मूर्तियां न मिले तो मुझे फांसी पर लटका दो।
मिल्लत टाइम्स: नई दिल्ली:बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर तेज हुई राजनीतिक सरगर्मियां के बीच बीजेपी के सांसद ने विवादित बयान दे डाला है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने शुक्रवार (23 नवंबर) को दिल्ली स्थित जामा मस्जिद को तोड़ने की वकालत कर डाली। उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आप जामा मस्जिद तोड़िए और यदि मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे मूर्तियां न मिलें तो मुझे फांसी पर लटका दीजिए।
साक्षी महाराज ने कहा, ‘मैं राजनीति में जब आया तो मेरा पहला बयान मथुरा में था। मैंने उस वक्त कहा था कि ‘अयोध्या, मथुरा छोड़ो…दिल्ली की जामा मस्जिद तोड़ो। अगर सीढ़ियों में मूर्तियां न मिले तो मुझे फांसी पर लटका देना।’ मैं आज भी अपने उस बयान पर कायम हूं।’ बीजेपी सांसद ने दावा किया कि मुगलों ने हिन्दुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। मुगल शासकों ने 3000 से ज्यादा मस्जिदों का निर्माण मंदिरों को तोड़ कर कराया था।
उम्मीद है राम मंदिर पर लोकसभा चुनाव से पहले आएगा कानून’: बीजेपी सांसद साक्षी महाराज का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। हिन्दुवादी संगठनों के प्रदर्शन को देखते हुए अयोध्या में व्यापक पैमाने पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। विश्व हिन्दू परिषद ने मंदिर आंदोलन को एक बार फिर से तेज कर दिया है।
वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी अयोध्या पहुंच रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर बनाने के मसले पर भी साक्षी महाराज ने बीजेपी का रुक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा अध्यक्ष मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस मसले पर अपना रुख स्पष्ट करें।’ साक्षी महाराज ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी सरकार वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सोमनाथ मंदिर की तरह ही अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए कानून लाएगी। बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने का मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कांग्रेस समेत प्राय: सभी विपक्षी दल सर्वोच्च अदालत के फैसले को मानने की बात कह रहे हैं।
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