पटना: हितेश कुमार.सभी को गंभीर होने की ज़रूरत है, हालात बदल चुके हैं, आज हम मिलजुल कर रहना सीख चुके हैं. मुख्यमंत्री ने उर्दू के लिए बहुत कुछ किया है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि आज भी वह उर्दू के लिए बहुत कुछ सोचते हैं. बहुत कुछ करमे का जज़्बा है. आपसी बातचीत में भी वह उर्दू को लेकर चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि इर्टीज़ा करीम की बात दोहराते हुए कहा की मम्मी डैडी की युग में आ गए हैं.
अम्मी-अब्बु का लुत्फ़ खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि यह समझने की ज़रूरत है कि उर्दू एक धर्म या एक जाति की भाषा नहीं है. यह इतनी मीठी ज़ुबान है कि इसके बोलने वाले का सामने वाले पर काफी असर पड़ता है. उर्दू सीखने वालों को प्रमाणपत्र देने पर वर्मा ने कहा कि इस तरह का काम होता रहना चाहिए. इससे लोगों में उर्दू सीखने का जज़्बा पैदा होगा.
उन्होंने कहा कि में जिस गांव से आता हूँ वहां मिलजुली आबादी है. बचपन से ही उर्दू को लेकर काफी कुछ सीख लिया. आज विधानसभा में लोग उर्दू को लेकर मेरी तारीफ करते हैं. वर्मा मे कहा कि वह गुज़ारिश करते हैं की हर स्कूल में उर्दू पढ़ाई जाये और इसे अनिवार्य किया जाये. इससे लोगों में साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ेगा. उर्दू को लेकर राजनीति और साम्प्रदायिकता को लेकर उन्होंने शेर कह टिप्पणी की। कहा कि “हादसों की भीड़ है तो क्या मुस्कुराना छोड़ दें, ज़लज़लों के डर से क्या घर बनाना छोड़ दें.”
उन्होंने कहा की नीतीश कुमार के आने के बाद उर्दू की तस्वीर बदली है. बिहार के मदरसों को सारी सुविधाएं मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि कोई अच्छा काम करे तो उसकी तारीफ होनी चाहिए. हमारे मुख्यमंत्री उर्दू की बहुत चिंता करते हैं. उन्होंने कहा की उर्दू के लिए काम करते रहे. सरकार हर तरह से आपके साथ है। एक शेर के साथ अपनी बात समाप्त की. कोई शिकवा, कोई गिला रहे हमसे, यह ज़रूरी है कि कोई सिलसिला रहे हमसे.
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