एड.अन्सार इन्दौरी:दोस्तों!शादी ब्याह में दहेज़ और फ़िज़ूल खर्ची की रोकथाम के लिए यूँ तो सभी समाजो के साथ मुस्लिम समाज में भी सामूहिक विवाह की परम्परा शुरू हुई है
लेकिन सभी जानते है इस नाम पर सियासत और खुले रूप से दहेज़ की लिस्ट प्रचारित होती है खाना टेंट वगेरा के खर्च के बाद निजी तोर पर दावतों में अलग खर्च होते है और फिर इन रिश्तो में से कई रिश्ते दरकने लगते है क्योंकि सामूहिक विवाह सम्मेलनों में भी दहेज़ का लालच बरक़रार है लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के इस दौर में इस्लामी विचारधारा के अलम्बरदार सुशिक्षित नौजवान डॉ. मीनारूल शेख ने इस्लाम के मुताबिक़ बिना किसी दहेज़, घोड़े बाजे,दबाव और शोरशराबे के इस्लामिक तरीके से निकाह क़ुबूल कर एक मिसाल क़ायम कर दी है।एक शिक्षक,एक लेखक,एक तन्क़ीद निगार,एक समाज सेवक,अरबी ज़बान में पीएचडी करे हुए नोजवान अगर इस दौर में ऐसा करे तो अजूबा सा लगता है।लेकिन दोस्तों बंगाल की शख्सियत डॉ. मीनारूल शेख ने इस्लामी निकाह कर मुर्शिदाबाद ही नहीं,बंगाल के ही नहीं पुरे हिन्दुस्तान के नोजवानो को यह सोचने वाला समाज सुधार का पैग़ाम दिया है।
दोस्तों यह सज धज कर सूटेड बूटेड खड़ा नोजवान इस्लामिक निकाह की एक मिसाल,एक सुबूत,एक गवाह बन चुका है। डॉ. साहब शरीयत के मुताबिक़ बिना किसी लोभ लालच,दान दहेज़,बेण्ड बाजे के शोरशराबे से दूर ,लाखो रुपए की चमक दमक के खर्च से परे एक शरीयती निकाह के अलम्बरदार बने है।जी हाँ दोस्तो इन्होने अलीगढ़ की एक इंतिहाई गरीब लेकिन होनहार लड़की से बिना किसी धूमधड़ाके के निकाह कूबूल है कहकर खर्चिली ओर महंगी शादी करनें वालो के सामने एक मिसाल क़ायम की है।गरीब,दलीत और शोषित उत्पीड़ित लोगों को इंसाफ दिलाने के लिये जद्दोजहद कर रहे डॉ. मीनारूल शेख के पास लोगो का दिल जीतने का हुनर है।वो जो कहते है वोह करके भी दिखाते भी है। डॉ. मीनारूल शेख इन दिनो पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया के पश्चिम बंगाल के जनरल सेक्रेटरी हैं।
अल्लाह इनके निकाह में बरकत अता फरमाये और इनसे चलने वाली नस्लो को भी तहरीके इस्लामी का कारकून बनाये।
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